Posts

Showing posts from 2012

कुंडली और मांगलिक दोष विचार.

भा रतीय ज्योतिष में मांगलिक दोष की प्रचलित परिभाषा के अनुसार यह माना जाता है कि अगर मंगल ग्रह किसी कुंडली के 1,2,4,7,8 या 12वें भाव में स्थित हो तो उस कुंडली में मांगलिक दोष बन जाता है जिसके कारण कुंडली धारक की शादी में देरी हो सकती है अथवा/और उसके वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं एवम बाधाएं आ सकती हैं तथा बहुत बुरी हालत में कुंडली धारक के पति या पत्नि की मृत्यु भी हो सकती है। इस गणना के लिए लग्न भाव को पहला भाव माना जाता है तथा वहां से आगे 12 भाव निश्चित किए जाते हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का लग्न मेष है तो मेष, वृष, कर्क, तुला, वृश्चिक तथा मीन राशि में स्थित होने पर मंगल ग्रह उस व्यक्ति की कुंडली में क्रमश: 1,2,4,7,8 तथा 12वें भाव में आएगा और प्रचलित परिभाषा के अनुसार उस व्यक्ति की कुंडली में मांगलिक दोष बन जाएगा। मांगलिक दोष वाले व्यक्तियों को साधारण भाषा में मांगलिक कहा जाता है। इस परिभाषा के आधार पर ही अगर मांगलिक दोष बनता हो तो दुनिया में 50 प्रतिशत लोग मांगलिक होंगे क्योंकि कुंडली में कुल 12 ही भाव होते हैं तथा उनमें से उपर बताए गए 6 भावों में मंगल के स्थ...